Home Blog चेहरा नीतीश का, ताकत में रहेगी बीजेपी:यूपी-एमपी मॉडल पर चलेगी बिहार सरकार

चेहरा नीतीश का, ताकत में रहेगी बीजेपी:यूपी-एमपी मॉडल पर चलेगी बिहार सरकार

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भाजपा 17 महीने चीखती रही- बिहार में फिर जंगलराज आ गया है। नीतीश जंगलराज लाने वाले लालू की गोद में बैठे हैं। अब वही बीजेपी सरकार में है। सबसे बड़ी चुनौती यही दिखाने की होगी कि जंगलराज था और अब इसे खत्म किया जा रहा है।
इसके लिए नई सरकार बनने के साथ पहली प्राथमिकता क्राइम कंट्रोल है। स्टाइल यूपी और एमपी वाला होगा। सामने लोकसभा चुनाव फिर अगले साल विधानसभा चुनाव है। इसलिए सरकार का इस पर सबसे ज्यादा फोकस हाेगा। क्राइम कंट्रोल के लिए गृह विभाग होना जरूरी है, इस बार बीजेपी गृह विभाग अपने पास चाहती है। अभी तक यह विभाग नीतीश अपने पास ही रखते रहे हैं।बिहार में कानून की रक्षा करने वाली पुलिस पर साल 2023 में 100 से अधिक हमले हुए हैं। पिछले 6 महीने में तीन-तीन दरोगा को रेत और बालू माफिया ने मौत के घाट उतार दिया। पुलिस मुख्यालय के आंकड़े बताते हैं, 2022 में बिहार पुलिस पर 450 से अधिक बार हमले हुए हैं। यह आंकड़ा 2020 और 2021 मिलाकर 340 था। पुलिस पर हुए हमले पर ठोस कार्रवाई करने के बजाए पुलिस 6 हजार से अधिक लोगों को जेल भेजने की बात कहकर अपनी पीठ थपथपाती रही।ये मॉडल बिहार में क्यों और कैसे लागू हो सकता है-
साल 2017 तक यूपी भी बिहार की तरह क्राइम वाला स्टेट माना जाता था। यहां भू माफिया और भ्रष्टाचार के साथ गुंडाराज चरम पर था। योगी आदित्यनाथ के हाथ में यूपी की बागडोर आने के बाद सरकार की यह छवि बनी कि एनकाउंटर, बुलडोजर स्टाइल से अपराध कम हो गए हैं। इसका फायदा विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिला।

बिहार में भाजपा शुरू से ही माफियाओं पर बुलडोजर और अपराधियों के एनकाउंटर की मांग करती आ रही है। इन दोनों एक्शन से नई सरकार को दो फायदे होंगे। पहला- अपराधियों में खौफ बढ़ेगा और क्राइम कंट्रोल जल्दी हो जाएगा। दूसरा- NDA सरकार को यह साबित करने में कामयाबी मिलेगी कि तेजस्वी की वजह से क्राइम बढ़ा था।एक्सपर्ट बताते हैं, पब्लिक तो लॉ एंड ऑर्डर से ही खुश हो जाती है। आम जनता की तो हर सरकार से बस एक ही अपेक्षा रहती है, बिहार क्राइम फ्री हो जाए। यह ऐसा मुद्दा है जो हर एक व्यक्ति को प्रभावित करता है। इसलिए यूपी में योगी सरकार ने अपनी अलग छवि बनाई। बुलडोजर मॉडल लाया तो उसकी चर्चा पूरे देश में हुई। ऐसे ही मॉडल पर अब एमपी में भाजपा हिट कर रही है। इससे दोनों राज्यों में भाजपा की छवि काफी बदली है।
महागठबंधन की सरकार में समाज से ज्यादा जातियों पर फोकस रहा है। जातीय जनगणना कराकर ओबीसी, ईबीसी और महादलित में बांटकर बीजेपी के हिंदुत्व से लड़ने की तैयारी हो रही थी, नई सरकार में यह बदल जाएगा। बीजेपी का पूरा फोकस रहेगा कि सरकार जाति की जगह गरीब, किसान, महिला पर बात करे। इस तरह बीजेपी अपने कोर वोट बैंक को जातियों में बंटने से रोकने की कोशिश करेगी।
जातिगत आंकड़े जब सदन में रखे जा रहे थे, तब भाजपा की टॉप लीडरशिप बयान दे रही थी कि बीजेपी जाति नहीं सर्व समाज की बात करती है।
नई सरकार गठन से पहले ही नीतीश कुमार ने सबसे पहले आरजेडी से करीबी वाले आईएएस और आईपीएस अफसरों को साइड लाइन कर किया। 24 घंटे में ही 146 अफसरों का तबादला कर दिया। सबसे पहले बिहार प्रशासनिक सेवा के 45 और भारतीय प्रशासनिक सेवा के 22 अफसरों का तबादला किया गया। इस ट्रांसफर के कुछ घंटे बाद ही 79 आईपीएस अफसरों का भी तबादला कर दिया। इसमें 14 जिलों में नए एसपी तैनात कर दिए गए।
नीतीश कुमार के इस एक्शन से साफ लग रहा है कि नई सरकार प्रशासकीय सख्ती की बड़ी तैयारी में हैं।
सीनियर जर्नलिस्ट लव कुमार मिश्रा बताते हैं, जेडीयू और बीजेपी की संयुक्त सरकार पहली प्राथमिकता लॉ एंड ऑर्डर को देगी। नीतीश कुमार 2005 में ऐसे ही दावों को लेकर सत्ता में आए थे। बिहार में इधर हाल के दिनों में अपराध काफी बढ़ गया है। हत्याएं बहुत हो रही हैं। बैंक लूट और डकैती आम बात हो गई। चेन स्नेचिंग से लेकर बड़ी-बड़ी लूट की घटनाएं आम आदमी की सुरक्षा को लेकर चुनौती बनी हुई है। ऐसे में यह बात पूरी तरह से साफ है कि टॉप प्रायोरिटी लॉ एंड ऑर्डर को ही दी जाएगी। इसका संकेत अंतिम 24 घंटे में नीतीश कुमार की ओर से सर्किल अफसरों से लेकर सेक्रेटरी तक का ट्रांसफर पोस्टिंग करके दिया गया। कई जिलों के डीएम-एसपी से लेकर आईजी-डीआईजी तक बदल दिए गए।
मिश्रा कहते हैं, ‘यह सब सरकार बनने के बाद होता है, लेकिन इस बार ऐसा लग रहा है कि बीजेपी की तरफ से डील के साथ ही सीएम को राजी किया गया होगा, जिसके बाद अंतिम समय में इतने बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की गई है।’

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